Mhatma Jyotiba Phule

Mahatma Jyotiba Phule भारत की सामाजिक क्रांति के पितामह ज्योतिबा फुले

Mahatma Jyotiba Phule भारत की सामाजिक क्रांति के पितामह ज्योतिबा फुले

Mahatma Jyotiba Phule भारत की सामाजिक क्रांति के पितामह ज्योतिबा फुले

 

 

 

 

 

 

 

Mahatma Jyotiba Phule भारत की सामाजिक क्रांति के पितामह ज्योतिबा फुलेआधुनिक भारत में जिन्होंने सामाजिक परिवर्तन की लड़ाई की शुरूवात की ऐसे महापुरुष, राष्ट्रपिता महात्मा ज्योतिबा फुले इनके 193 वी जयंती (11 अप्रेल, 1827) के उपलक्ष्य में आपको और आपके परिवार को हार्दिक बधाईयां.

कहीं हम भूल ना जायें 

 

🔹 बाबासाहब डॉ. बी. आर. आंबेडकर ने महात्मा ज्योतिबा फुले को “Father of India’s Social Revolution” (भारत की सामाजिक क्रांति के पिता) कहा था। साथ ही उन्हें अपना तिसरा गुरु भी माना।

🔹 महात्मा फुले  ने भारत में महीलाओं, शुद्रों (आज के OBC), औ र अतिशुद्रों (SC, ST) को शिक्षा (Education) मिले इस लिए सन 1848 से बड़े पैमाने पर कोशिश की और उनके लिये स्कुल खोले।

राष्ट्रपिता महात्मा ज्योतिबा फुले

🔹 भारत में सदियों से चली आ रही विषमतावाद/जातीवाद की गुलामी को उजागर करने के लिए महात्मा फुले इन्होंने लोगों में जन-जागृती करने हेतु अनेक कार्यक्रम चलाए, साथ ही गुलामगिरी, किसान का कोड़ा, जैसी किताबें भी लिखी जो आज भी विषमतावादीयों/जातीवादीयों की पोल खोलती है।

🔹मनुवाद्यीयो ने भारत में सच्चा इतिहास छुपाकर झुठे कर्मकांड, रिती-रिवाज, परंपराये, अंधश्रध्दा का बोलबाला किया था, जिस में तर्कवाद, सुधारवाद, और मानवतावाद के लिए कहीं कोई जगह नहीं थी।

जिससे लड़ने के लिए महात्मा फुले ने “सत्यशोधक समाज संगठन” (सत्य को खोज कर सत्य उजागर करने वाले संगठन) की स्थापना की थी।

राष्ट्रपिता महात्मा ज्योतिबा फुले

🔹 सन 1882 में अंग्रेजों द्वारा भारत में सुधार करने हेतु “हंटर कमिशन” का गठन किया।

महात्मा फुले इन्होंने हंटर आयोग को एक निवेदन दिया जिसमें उन्होंने सरकार से यह मांग की, के भारत में प्राथमिक शिक्षा मुफ्त एवं अनिवार्य की जाए, जिसका विरोध विषमतावादियों ने किया, जिस कारण उसे सरकार द्वारा लागू नहीं किया गया।

सोचों यदी महात्मा फुले की बात सन 1882 में मान ली जाती तो आज भारत की गणना कहा होती?

Father of the Nation Mahatma Jyotiba Phule

महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले के संघर्ष ने भारत में शिक्षा के द्वार सभी के लिए खोल कर अज्ञानता की बेड़ीयो को तोड कर विषमतावाद की बुनियाद ही हिला डाली।

सामाजिक परिवर्तन की लड़ाई महात्मा फुले  अपने जीवन के अंत तक लड़ते रहे और 28 नवंबर, 1890 में वे हमें छोड़ कर चले गए।

https://www.margdata.com/2020/04/14/baba-sahab-v-mata-rama-bai/

ऐसे महान महापुरुष को उनके जयंती के उपलक्ष्य पर  कोटी-कोटी नमन
जय फुले

 

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